राजस्थान के दुर्ग(GURUGGKWALA)

राजस्थान के राजपूतों के नगरों और प्रासदों का निर्माण पहाडि़यों में हुआ, क्योकि वहां शुत्रओं के विरूद्ध प्राकृतिक सुरक्षा के साधन थे। शुक्रनीति में दुर्गो की नौ श्रेणियों का वर्णन किया गया। एरण दूर्ग खाई, कांटों तथा कठौर पत्थरों से युक्त जहां पहुंचना कठिन हो जैसे – रणथम्भौर दुर्ग। पारिख दूर्ग जिसके चारों ओर खाई … Read more

मेवाड़ का गुहिल वंश (MEWAD KA GUHIL VANSH)

मेवाड़ का गुहिल वंश(MEWAD KA GUHIL VANSH) उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ एवं प्रतापगढ़ तथा इनके आस-पास का क्षेत्र मेवाड़ कहलाता था। प्राचीन काल में इसका नाम शिवि, प्राग्वाट, मेद्पाट आदि था। इस क्षेत्र पर पहले मेर अथवा मेद् जाति का अधिकार होने के कारण इसका नाम मेद्पाट पड़ा। रावल समरसिंह की चित्तौड़ प्रशस्ति से गुहिल वंश … Read more

राजपूत युग (RAJPUT YUG)

राजस्थान में राजपूत वंशों का उदय / राजपूत युग हर्षवर्धन की मृत्यु (648 ई.) से लेकर मुह्हमद गौरी भारत में दिल्ली सल्तनत की स्थापना करने (1206 ई.) तक का काल भारतीय इतिहास में राजपूत काल के नाम से प्रसिद्ध है। इस काल में राजस्थान अनेक राजपूत वंशों ने अपनी सत्तायें स्थापित की जिनमें गुर्जर-प्रतिहार, चौहान, … Read more

Curent Affairs(नवीनतम समसामयिक )

2 .निर्वाचन आयोग ने किसको “राष्ट्रीय दिव्यांग आइकोन” घोषित किया है -शीतल देवी 3. ‘WTT फीडर बेरुत-||’ (2024) टेबिल टेनिस टूर्नामेंट में महिला एकल ख़िताब किसने जीता -श्रीजा अकुला (भारत ) 4. नागरिक उड्डयन अनुसन्धान संगठन केंद्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कहाँ किया गया -हैदराबाद 5.वर्ष 2024 में कोनसी लोकसभा के लिए … Read more

राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत -(SOURCE OF KNOW RAJASTHAN HISTORY)

राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत इतिहास का शाब्दिक अर्थ- ऐसा निश्चित रूप से हुआ है। इतिहास के जनक यूनान के हेरोडोटस को माना जाता हैं लगभग 2500 वर्ष पूर्व उन्होने “हिस्टोरिका” नामक ग्रन्थ की रचना की। भारतीय इतिहास के जनक महाभारत के लेखक वेद व्यास माने जाते है। कर्नल जेम्स टॉड को राजस्थान के … Read more

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताये

इतिहास को प्रागैतिहासिक काल, आद्यऐतिहासिक काल एवं ऐतिहासिक काल में बांटा जाता है। प्रागैतिहासिक काल से तात्पर्य है कि उस समय के मानव के इतिहास के बारे में कोई लिखित सामग्री नहीं मिलती है बल्कि पुरातात्विक सामग्रियों के आधार पर ही उसके इतिहास (संस्कृति) के बारे में अनुमान लगाया जाता है। ऐसी सभ्यता एवं संस्कृतियों … Read more