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1. इंडोनेशिया पहुंचे पीएम मोदी, जकार्ता हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो ने किया स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 देशों की यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया के जकार्ता पहुंचे। जकार्ता हवाई अड्डे पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ श्री मोदी का भव्य स्वागत किया। इंडोनेशिया में भारतीय राजदूत और भारतवंशी समुदाय के अनेक सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। पीएम मोदी ने विहार धर्म रत्न ग्रुप के कलाकारों की ओर से किया गया ‘होमेज टू द ट्रिपल जेम’ नाम के प्रदर्शन को असाधातरण बताते हुए कहा कि इसमें भगवान बुद्ध की कालातीत शिक्षाओं और ट्रिपल जेम के गहरे मूल्यों को बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया। पीएम मोदी 6 से 11 जुलाई तक को 3 देशों इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर हैं।
2. आंध्र प्रदेश में 13वीं शताब्दी का शिलालेख मिला

6 जुलाई को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में 13वीं शताब्दी का एक दुर्लभ शिलालेख मिला। ये शिलालेख प्राचीन तेलुगु भाषा में है। इस शिलालेख पर तत्कालीन राजाओं और स्थानीय प्रशासन की जानकारी है। इस शिलालेख में मंदिरों की भूमि और दान से संबंधित ऐतिहासिक साक्ष्य हैं। ये शिलालेख मध्यकालीन दक्षिण भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य है। ये शिलालेख काकतीय वंश या उसके समकालीन शासकों के समय का माना जा रहा है। इस शिलालेख में मध्यकालीन आंध्र प्रदेश के सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक इतिहास से जुड़ा है। शिलालेख की भाषा और लिपि का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया गया है।
3. भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’

भारतीय नौसेना को जल्द ही एक और अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत मिलने जा रहा है। प्रोजेक्ट-17ए श्रृंखला के छठे स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि (एफ-38) को 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित समारोह में नौसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। महेंद्रगिरि का डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। यह युद्धपोत सतह से सतह और सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलों, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक सेंसर, पनडुब्बी रोधी हथियारों और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसे नौसेना की बहुआयामी युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वतमाला के नाम पर रखा गया है, जो शक्ति, धैर्य और अडिग संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। भारतीय नौसेना के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब किसी युद्धपोत को ‘महेंद्रगिरि’ नाम दिया गया है। महेंद्रगिरि में आधुनिक कंबाइंड डीजल ऑर गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली लगाई गई है।
4. ड्रग्स के खिलाफ भारत का डिजिटल सुरक्षा कवच बना MANAS

देश में नशे की समस्या और ड्रग तस्करी से निपटने के लिए केंद्र सरकार का डिजिटल प्लेटफॉर्म MANAS (मादक पदार्थ निषेध सूचना केंद्र) नागरिकों के लिए एक अहम माध्यम बनकर सामने आया है। यह प्लेटफॉर्म लोगों को ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियों की गोपनीय शिकायत करने, काउंसलिंग लेने और पुनर्वास सहायता तक पहुंच बनाने की सुविधा देता है। MANAS को 18 जुलाई 2024 को गृह मंत्रालय के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) के सहयोग से लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य डिजिटल तकनीक की मदद से लोगों को नशे के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भागीदार बनाना है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1933, आधिकारिक पोर्टल, ईमेल और UMANG ऐप के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। लोग अपनी पहचान बताए बिना ड्रग तस्करी, बिक्री, अवैध खेती और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दे सकते हैं।
5. वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम शामिल

6 जुलाई को मध्य प्रदेश ने देश ने वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू (गैर-मुस्लिम) सदस्यों को बोर्ड शामिल किया। वक्फ बोर्ड में ये बदलाव (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत किया गया है। इस नए नियम के तहत बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का नियम बनाया गया है। इस संशोधन के तहत मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने पहली बार हिंदू सदस्य मनोज मालपानी (इंदौर) और अनिमेष भार्गव (गुना) को नियुक्त किया है। इसके साथ ही सनवर पटेल को बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। मप्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है। मप्र सीएम मोहन यादव ने 10 सदस्यीय बोर्ड की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता लाना है। वक्फ बोर्ड अधिनियम 1995 में बनाया गया था। वक्फ बोर्ड (संशोधन) अधिनियम, 2025 में कई सारे बदलाव किए गए हैं। इसमें कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए जैसे ‘वक्फ बाय यूजर’ पर रोक लगाई गई यानी, सिर्फ लंबे समय से धार्मिक उपयोग के आधार पर किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने की व्यवस्था को खत्म किया गया। पहले से रजिस्टर्ड संपत्तियों को शर्तों के तहत संरक्षण दिया गया है। इसके तहत धारा 40 को हटाया गया, जिसके तहत वे किसी संपत्ति को एकतरफा वक्फ घोषित कर सकते थे।
6. बिहार में मिला सबसे पुराना और सटीक तिथि वाला बरगद का वृक्ष

वैज्ञानिकों ने बिहार के मुंगेर में स्थित लगभग 700 वर्ष पुराने बरगद के वृक्ष की रेडियोकार्बन डेटिंग (Radiocarbon Dating) के माध्यम से आयु निर्धारित करते हुए उसे अब तक का वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक सटीक आयु-निर्धारित बरगद (Ficus benghalensis) घोषित किया है। यह उपलब्धि उष्णकटिबंधीय विरासत वृक्षों की वैज्ञानिक आयु-निर्धारण प्रक्रिया के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। इस अध्ययन का नेतृत्व डॉ. तृणा बोस ने किया, जो भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराजीवविज्ञान संस्थान (Birbal Sahni Institute of Palaeosciences) से संबद्ध हैं। शोधकर्त्ताओं ने वृक्ष के केंद्र (Pith) के निकट से प्राप्त लकड़ी के नमूनों से अल्फा-सेलुलोज (Alpha-Cellulose) निकाला तथा उनकी आयु निर्धारण के लिये एक्सेलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) आधारित रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक का उपयोग किया। प्राप्त परिणामों का IntCal20 कैलिब्रेशन कर्व तथा OxCal सॉफ्टवेयर की सहायता से अंशांकन किया गया, जिससे वृक्ष की आयु का सटीक निर्धारण संभव हुआ। वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार इस बरगद के वृक्ष की आयु लगभग 700 वर्ष निर्धारित की गई। बरगद के पेड़ों में सामान्य वृक्षों की तरह अनुअल रिंग नहीं बनते, इसलिए इसकी उम्र तय करने के लिए आधुनिक कार्बन डेटिंग टेक्नोलॉजी का सहारा लिया गया।
7. कोच्चि में BRICS महिला कार्य समूह की बैठक शुरू

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत केरल के कोच्चि में सोमवार से ब्रिक्स महिला कार्य समूह (डब्ल्यूडब्ल्यूजी) की दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई। इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों (11) के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं और महिला सशक्तिकरण, महिला नेतृत्व में विकास तथा साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण” के तहत आयोजित की जा रही है, जो एक जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस कार्य समूह बैठक के बाद दो दिवसीय ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक होगी, जिसका समापन 9 जुलाई 2026 को होगा।
8. गुवाहाटी में ब्रिक्स एंटी-ड्रग सम्मेलन शुरू

भारत अपनी ‘ब्रिक्स’ अध्यक्षता के तहत 6-7 जुलाई को गुवाहाटी में ‘ब्रिक्स’ देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। इसमें ‘ब्रिक्स’ सदस्य देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
9. ब्राजील के नेमार जूनियर ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा की

ब्राजील के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी नेमार जूनियर ने, फीफा विश्वकप के राउंड-16 में नॉर्वे से 2-1 से हार के बाद, अंतरराष्ट्रीर फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा की है। नेमार जूनियर हमेशा ब्राजील के सबसे प्रमुख स्कोरर रहे। मैच में ब्राजील के लिये एकमात्र गोल करने के बावजूद नेमार अपनी टीम को हार से नहीं बचा पाये। नेमार ने 2010 में मेटलाइफ स्टेडियम में ब्राजील की तरफ से अपना पहला इंटरनेशनल डेब्यू किया था। नेमार ने उसी स्टेडियम में संन्यास लिया। नेमार ने अपने करियर में 130 इंटरनेशनल मैच खेले हैं और ब्राजील के लिए उनसे ज्यादा मैच सिर्फ काफू (142) ने खेले।
10. विश्व चॉकलेट दिवस

विश्व चॉकलेट दिवस हर वर्ष 7 जुलाई को मनाया जाता है। माना जाता है कि वर्ष 1550 में इसी दिन पहली बार यूरोप में बड़े पैमाने पर चॉकलेट पहुंची थी। इसके बाद धीरे-धीरे चॉकलेट पूरे यूरोप और फिर दुनिया के अन्य हिस्सों में लोकप्रिय होती चली गई। इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए 7 जुलाई को विश्व चॉकलेट दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। हालांकि विभिन्न देशों में राष्ट्रीय चॉकलेट दिवस अलग-अलग तारीखों पर भी मनाया जाता है, लेकिन 7 जुलाई को मनाया जाने वाला विश्व चॉकलेट दिवस सबसे अधिक लोकप्रिय माना जाता है।
11. विश्व जूनोटिक रोग दिवस

इस खास दिन को मनाने के पीछे चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) के इतिहास की एक बेहद भावुक और क्रांतिकारी कहानी जुड़ी है। बात 6 जुलाई 1885 की है, जब फ्रांस के महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर (Louis Pasteur) ने दुनिया को एक नया जीवनदान दिया था। हुआ यह था कि जोसेफ मेइस्टर नाम के एक नौ साल के मासूम बच्चे को एक पागल कुत्ते ने बुरी तरह काट लिया था। उस दौर में रेबीज होने का सीधा मतलब था तड़प-तड़प कर मौत। लुई पाश्चर ने अपनी लैब में एक नई वैक्सीन (टीका) तैयार तो की थी, लेकिन उसका इंसानों पर ट्रायल नहीं हुआ था। मासूम की जान बचाने के लिए उन्होंने एक बड़ा जोखिम लिया और उस बच्चे को रेबीज की पहली सफल वैक्सीन दी। चमत्कार हुआ, बच्चा पूरी तरह ठीक हो गया! इस तरह इंसानों ने जानवरों से फैलने वाली सबसे खतरनाक बीमारी को हराने की दिशा में अपना पहला कदम बढ़ाया। इसी ऐतिहासिक कामयाबी के सम्मान में हर साल 6 जुलाई को ‘विश्व जूनोटिक रोग दिवस’ मनाया जाता है।
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