13–16 minutes
1. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने “भारत इनोवेट्स 2026” का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के नीस में पैले दे एक्सपोज़िशन दे नीस में भारत इनोवेट्स 2026 के प्रथम संस्करण का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। शिक्षा मंत्रालय की एक पहल के रूप में आयोजित यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम, भारत के डीप-टेक इनोवेटर्स और वैश्विक हितधारकों के बीच नवाचार-आधारित साझेदारियों को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करता है। उद्घाटन के बाद, दोनों नेताओं ने भारत इनोवेट्स इनोवेशन पैविलियन का दौरा किया। यहाँ भारतीय नवप्रवर्तकों और देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा विकसित 120 अत्याधुनिक तकनीकों और क्रांतिकारी नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। ये नवाचार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, गतिशीलता और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी बायोटेक्नोलॉजी, जैसे क्षेत्रों से जुड़े थे। भारत इनोवेट्स का उद्देश्य भारतीय डीप-टेक नवाचारों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रोत्साहित करना है, ताकि दुनिया भर के निवेशकों, उद्योग जगत, संस्थानों और नवप्रवर्तकों के साथ साझेदारियों को बढ़ावा मिल सके। इससे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्रों में भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के साथ-साथ वैश्विक नवाचार नेटवर्क में भारत की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। 14 से 16 जून 2026 तक तीन दिन तक आयोजित होने वाला भारत इनोवेट्स 2026 एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसमें 11 उच्च-स्तरीय पैनल चर्चाएं, विभिन्न क्षेत्रों पर केन्द्रित मास्टरक्लास, क्यूरेटेड बी2बी मैचमेकिंग बैठकें, 50 से अधिक स्टार्टअप्स की भागीदारी वाले विशेष निवेशक पिच सत्र, तथा वैश्विक निवेशकों, कॉर्पोरेट संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, इनक्यूबेटरों और नीति-निर्माताओं के साथ समर्पित नेटवर्किंग सत्र शामिल हैं। यह कार्यक्रम वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों, शिक्षाविदों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाता है, जहां वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, अंतरिक्ष, रक्षा और जलवायु प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर विचार-विमर्श करेंगे। भारत इनोवेट्स का प्रथम संस्करण भारत और फ्रांस की उस साझी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत दोनों देश सहयोग, प्रतिभा और परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों से प्रेरित भविष्य-के लिए तैयार एक नवाचार इकोसिस्टम तैयार करने को बढ़ावा देना चाहते हैं।
2. भारत-फ्रांस एटीएल ब्रिज की स्थापना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत-फ्रांस के बीच नवाचार-आधारित सहयोग को और गहरा करने तथा दोनों देशों के युवा नवप्रवर्तकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अटल नवाचार मिशन (एआईएम), नीति आयोग एवं ला फोंडेशन दसॉल्ट सिस्टम्स ने भारत-फ्रांस एटीएल ब्रिज की स्थापना की है। यह पहल भारत के अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) मॉडल से प्रेरित होकर फ्रांस में पहली स्कूल नवाचार प्रयोगशाला की स्थापना करती है। इसके माध्यम से युवा विद्यार्थियों को सहयोग करने, नवाचार इकोसिस्टम के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय नवाचार सहयोग को गहरा करने के लिए एक संरचित मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इस सहयोग को औपचारिक रूप देने वाले आशय-पत्र (एलओआई) का रविवार को फ्रांस में अटल नवाचार मिशन, नीति आयोग के निदेशक दीपक बागला और ला फोंडेशन दसॉल्ट सिस्टम्स के प्रबंध निदेशक मैरी-पियरे ओलास के बीच आदान-प्रदान किया गया। भारत-फ्रांस एटीएल ब्रिज भारत और फ्रांस के नवाचार इकोसिस्टम के बीच सीमापार नवाचार कार्यक्रमों, उद्यमिता आदान-प्रदान तथा गहन सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करेगा। ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और संयुक्त नवाचार गतिविधियों के माध्यम से यह पहल युवा नवप्रवर्तकों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान मिलकर करने तथा प्रारंभिक स्तर की नवाचार क्षमताओं को मजबूत करने में सक्षम बनाएगी। युवा नवप्रवर्तकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करके, इस पहल का उद्देश्य नवाचार की एक जीवंत संस्कृति को और विकसित करना तथा भारत और फ्रांस के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारियों को बढ़ावा देना है। भारत-फ्रांस एटीएल ब्रिज पहल को भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 के दौरान शुरू किया जा रहा है, जो दोनों देशों के नवाचार-आधारित सहयोग को मजबूत करने और भविष्य के लिए प्रतिभाएं तैयार करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
3. DRDO ने 3 सफल फ्लाइट मिसाइल टेस्टिंग की

DRDO ने 10 और 11 जून को लगातार 3 फ्लाइट टेस्ट किए, जिनमें मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जून को इसकी जानकारी सोशल मीडिया X अकाउंट पर शेयर की। इस टेस्टिंग में भारत की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों को रोकने की क्षमता को भी टेस्ट किया गया। इस टेस्टिंग में DRDO ने AD-1 और AD-2 इंटरसेप्टर मिसाइलों का सफल परीक्षण किया। ये मिसाइलें 2,000 से 5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचानने, ट्रैक करने और हवा में ही नष्ट करने में सक्षम हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन टेस्टिंग ने भारत उन देशों की श्रेणी में आ गया है, जिनके पास ICBM-स्तरीय खतरों को रोकने वाली BMD क्षमता है। बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक बेहतर रक्षा नेटवर्क है, जिसमें शक्तिशाली रडार, कमांड सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होती हैं। BMD का उद्देश्य दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाना, उनका पीछा करना और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले उन्हें नष्ट करना होता है। ये सिस्टम वायुमंडल के भीतर (एंडो-एटमॉस्फेरिक) और अंतरिक्ष क्षेत्र (एक्सो-एटमॉस्फेरिक) दोनों स्तरों पर मिसाइलों को भेद सकती है। ये टेस्टिंग भारत की मल्टी-लेयर्ड मिसाइल शील्ड को मजबूत बनाएगी। अमेरिका, रूस, चीन और कुछ अन्य देशों की तरह भारत भी अब उन्नत BMD क्षमता वाले देशों के समूह में शामिल हो गया है। भारत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरे को खत्म करने वाले देशों में शामिल हो गया है। भारत से पहले यह तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास थी। भारत बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम वाला 5वां देश बन गया है। इसके साथ ही नेवल एंटी-शिप मिसाइल मीडियम रेंज (NASM-MR) की भी सफल टेस्टिंग की गई। इसे भारत की समुद्री स्ट्राइक और डिफेंस स्किल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। AD-1 लंबी दूरी का टू स्टेप इंटरसेप्टर है, जो मध्यम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक सकता है। AD-2 Phase-II BMD सिस्टम का एडवांस इंटरसेप्टर है, जिसे हाई स्पीड और ICBM कैटेगरी के खतरों को खत्म करने के लिए विकसित किया गया है।
4. इसरो और परमाणु ऊर्जा विभाग मिलकर लूनर लैंडर के लिए उन्नत कृत्रिम तापन प्रणाली विकसित करेंगे

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान- इसरो ने लूनर लैंडर को चन्द्रमा पर कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर उन्नत कृत्रिम तापन प्रणाली विकसित करेगा। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बंगलुरू में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा स्टॉर्टअप उद्यमिता सम्मेलन में कहा कि सौर ऊर्जा से संचालित चन्द्रयान-3 का विक्रम लैंडर चन्द्रमा पर केवल 14 दिन कार्यरत रहा। अब इसरो परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ ऐसा लैंडर तैयार करने पर काम कर रहा है जो चन्द्रमा पर दो सौ दिन तक सक्रिय रहे। इस लैंडर में प्रतिकूल मौसम काम करने वाले कृत्रिम हीटर लगे होंगे। चन्द्रमा पर रात और दिन लगभग 14-14 पृथ्वी दिवस के बराबर होते हैं और दिन का तापमान 121 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और रात में यह 0 से 129 डिग्री सेल्सियस नीचे आ जाता है। श्री नारायणन ने बताया कि इसरो और सीएसआईआर ने तकनीकी सहयोग के 40 क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें से 17 को पहले चरण में कार्यावन्यन की स्वीकृति मिल चुकी है। ऐसी ही अनुसंधान साझेदारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ भी की जा रही है। इससे मानवयुक्त गगनयान मिशन के लिए औषधि तैयार करने में मदद मिलेगी। इसरो ने एक्सियोम-4 मिशन के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला द्वारा किए गए सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोगो के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ भी काम किया था।
5. केंद्र सरकार ने 100% शुद्ध इथेनॉल को मंजूरी दी

13 जून को केंद्र सरकार ने देश में 100% शुद्ध इथेनॉल को बतौर ईंधन इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। शुद्ध इथेनॉल का उपयोग बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य देश की कच्चे तेल (फॉसिल फ्यूल) के इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना है। इथेनॉल के इस्तेमाल से वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा और ये किफायती और टिकाऊ ऑप्शन है। भारत अभी अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करके पूरा करता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने इस बदलाव को मंजूरी दी है। कई बड़ी कंपनियां 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहन बाजार में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक टोयोटा , सुजुकी, MG और हुंडई सहित कुछ कंपनियां अगले 6 हफ्तों के भीतर इथेनॉल से चलने वाले वाहन लॉन्च करेंगे। एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है।
6. अर्थशास्त्री प्रोफेसर अलख एन. शर्मा श्रम सांख्यिकी पर बनी उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष नियुक्त किए गए

सरकार ने जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अलख एन. शर्मा को श्रम सांख्यिकी पर बनी उच्चस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह समिति देश में रोजगार और श्रम बाजार से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा करेगी और उन्हें अधिक सटीक, विस्तृत तथा समय पर उपलब्ध कराने के उपाय सुझाएगी। समिति भारत के बदलते श्रम बाजार का भी अध्ययन करेगी। प्रोफेसर शर्मा वर्तमान में मानव विकास संस्थान के निदेशक हैं। उन्हें रोजगार, श्रम, गरीबी और विकास से जुड़े विषयों पर 40 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
7. इंडियन आर्मी ऑफिसर्स अब बंदी जैकेट पहन सकेंगे

14 जून को भारतीय सेना ने अपनी नई ड्रेस रेगुलेशन बुकलेट (Army Uniforms-2026) जारी की। नए ड्रेस रेगुलेशन के मुताबिक, पहली बार फॉर्मल ड्रेस में बंदी जैकेट यानी, बंद गले के कोट को भी शामिल किया गया है। नए नियम के मुताबिक अब आर्मी ऑफिसर्स ड्यूटी पर रहते हुए बंदी जैकेट पहन सकेंगे। जैकेट को फुल-स्लीव शर्ट के ऊपर पहना जाएगा और ये सिंपल और सोबर किसी भड़कीले रंग की नहीं होगी। बंदी जैकेट के साथ मैच करते हुए ट्राउजर और बंद जूते पहनना अनिवार्य होगा। जैकेट में नेक-हुक (Neck Hook) हो या न हो, दोनों प्रकार की डिजाइन मान्य होंगी। इसके साथ ही ड्रेस नंबर 5 और नंबर 6 से सेरेमोनियल पाउच बेल्ट को हटाया गया है। वहीं परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना वैकल्पिक कर दिया गया है। नियमों के तहत महिला अधिकारी सादे रंगों की साड़ियां या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और टखने तक की लंबाई वाली सीधी पैंट पहन सकती हैं। इस नियम में बिना आस्तीन वाले कुर्ते और पलाजो या पैंट जैसे कैज़ुअल लोअर पहनने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई है। हाल ही में जारी 174 पेज के मैनुअल ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ में इन संशोधनों का जानकारी दी है। ये बदलाव सेना की वर्दी में मौजूद औपनिवेशिक (Colonial-era) परंपराओं को कम करने के लिए किया गया है। मैनुअल में लिखा गया है कि इन परिवर्तनों का उद्देश्य सेना की गरिमा, कार्यक्षमता और परंपराओं को बनाए रखते हुए औपनिवेशिक निशानियों को धीरे-धीरे खत्म करना है। एडजुटेंट जनरल ब्रांच (Adjutant General’s Branch) ड्रेस रेगुलेशन बुकलेट को जारी करती है। सेना के यूनिफॉर्म से जुड़े सभी दिशानिर्देश, डिजाइन और ग्रूमिंग मानक इसी विंग के तहत नियमित रूप से अपडेट और प्रकाशित किए जाते हैं।
8. आयुष मंत्रालय ने यूट्यूब पर सीधे योग प्रसारण के 4,35,831 दर्शकों का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया

आयुष मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त करते हुए रविवार को यूट्यूब पर सीधे योग प्रसारण के सबसे अधिक दर्शकों का नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। 4,35,831 दर्शक आयुष मंत्रालय के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के माध्यम से सीधे प्रसारण किए गए एक विशेष वैश्विक ऑनलाइन योग सत्र में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में कॉमन योगा प्रोटोकॉल (सीवाईपी) और योग 365 अभियान के माध्यम से योग को दैनिक अभ्यास के रूप में बढ़ावा देने के मंत्रालय के दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया गया। आयुष मंत्रालय ने 4,35,831 सत्यापित दर्शक दर्ज किए, जो 2024 में स्थापित 2,46,252 दर्शकों के पिछले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से अधिक है। इस नए रिकॉर्ड में पिछले रिकॉर्ड की तुलना में 1,89,579 दर्शक अधिक थे। इस प्रकार इसने यूट्यूब सीधे योग प्रसारण के सबसे अधिक दर्शकों का एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। इस वर्ष योग दिवस की थीम है – स्वस्थ आयु के लिए योग ।
9. श्रीलंका में भरतनाट्यम की सामूहिक प्रस्तुति ने बनाया गिनीज विश्व रिकॉर्ड

श्रीलंका के कोलंबो में पांच हजार से अधिक नर्तक-नर्तकियों ने भरतनाट्यम की सामूहिक प्रस्तुति देकर ऐतिहासिक सांस्कृतिक उपलब्धि हासिल की। इस सामूहिक प्रस्तुति को गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक विरासत के इस उत्सव का आयोजन भारत की संगमम ग्लोबल अकादमी और श्रीलंका की सम्गमिज़ लिया ने किया। इसमें श्रीलंका, भारत और कई अन्य देशों के हजारों नर्तकों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य भरतनाट्यम की शाश्वत परंपरा को प्रदर्शित करना और सीमाओं के पार सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना था। श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने कलाकारों और आयोजकों की ओर से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र ग्रहण किया।
10. विश्व वायु दिवस 2026

विश्व वायु दिवस हर साल 15 जून को पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में इसकी भूमिका को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। भारत 15 जून 2026 को गोवा में “विंड एनर्जी: एम्बिशन टू एक्सेलरेशन” थीम के तहत विश्व वायु दिवस 2026 सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस सम्मेलन में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA), सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (SECI), इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ विंड एनर्जी (NIWE), ग्रिड इंडिया, बड़ी राज्य सरकारों और उद्योग जगत और एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रतिनिधि एक साथ आएंगे। भारत में अनुमानित सकल पवन ऊर्जा क्षमता 120 मीटर पर 695.5 GW और ज़मीन से 150 मीटर ऊपर 1,163.9 GW है। 150 मीटर पर अनुमानित ऊर्जा क्षमता का ज़्यादातर हिस्सा आठ हाई-रिसोर्स राज्यों में है: राजस्थान: 284.2 GW; गुजरात: 180.8 GW; महाराष्ट्र: 173.9 GW; कर्नाटक: 169.3 GW; आंध्र प्रदेश: 123.3 GW; तमिलनाडु: 95.1 GW; मध्य प्रदेश: 55.4 GW, तेलंगाना: 54.7 GW।
VISIT TO YOUR YOUTUBE CHANNEL : https://youtube.com/@guruggkwala?si=TZD9ZVm9QJLjB9ed
VISIT TO YOUR WHATSAPP CHANNEL : https://whatsapp.com/channel/0029VbC4ngW3GJOy6IXPnk1F
THNKS TO SUPPORT GURUGGKWALA
