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1. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की पहली स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर वैक्सीन राष्ट्र को समर्पित की

कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सूअरों के लिए भारत की पहली स्वदेशी एमए-104 सेल लाइन आधारित जीवित क्षीणित अफ़्रीकी स्वाइन फीवर वैक्सीन समर्पित की है। भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (आईसीएआर-एनआईएचएसएडी) के वैज्ञानिकों ने सूअरों के लिए भारत का पहला स्वदेशी एमए-104 सेल लाइन आधारित जीवित क्षीणित अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) टीका विकसित किया है। एमए-104 सेल लाइन में अद्वितीय जीन विलोपन के साथ एक नए क्षीणित एएसएफवी जीनोटाइप II वायरस का उपयोग करके विकसित किया गया यह टीका पशु चिकित्सा अनुसंधान में एक बड़ी सफलता है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त है। यह दुनिया भर में घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करने वाली सबसे विनाशकारी पशु बीमारियों में से एक है। मंत्रालय ने कहा कि यह वैक्सीन पशु चिकित्सा अनुसंधान में एक बड़ी सफलता है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त है। यह वैक्सीन 8 सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों के लिए अनुशंसित है और इसे 1 मिलीलीटर इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। इसके बाद प्राथमिक टीकाकरण के 14 दिन बाद बूस्टर खुराक दी जाती है। अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ), अफ़्रीकी स्वाइन फीवर वायरस (एएसएफवी) के कारण होता है। यह दुनिया भर में घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करने वाली सबसे विनाशकारी सीमा-पार पशु बीमारियों में से एक है। तेज बुखार, रक्तस्राव और लगभग 100 प्रतिशत तक मृत्यु दर से पहचाने जाने वाली इस बीमारी ने वैश्विक सूअर पालन क्षेत्र को गंभीर सामाजिक-आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।
2. विश्वेश नेगी ईरान में भारत के नए राजदूत होंगे

3 अगस्त को विश्वेश नेगी ईरान में भारत के अगले राजदूत अपॉइंट हुए। विश्वेश 2002 बैच के इंडियन फॉरेंन ऑफिसर हैं और वे वर्तमान राजदूत डॉ. मोहम्मद फतह अली की जगह लेंगे। वर्तमान में विश्वेश विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर काम कर रहे हैं। विश्वेश 2002-2022 तक विदेश मंत्रालय में द्विपक्षीय कूटनीतिक दायित्व निभाए और भारत के विदेश मिशनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। सितंबर 2022 में विश्वेश भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) जॉइंट सेक्रेटरी अपॉइंट हुए। भारत-ईरान संबंध ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह, रीजनल कनेक्टिविटी, व्यापार और पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण हैं।
3. डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को विक्रम साराभाई मेडल मिला

4 अगस्त को भारतीय खगोल वैज्ञानिक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को COSPAR विक्रम साराभाई मेडल 2026 से सम्मानित किया गया। डॉ. अन्नपूर्णी ये मेडल पाने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं। अब तक कुल 4 भारतीयों को ये मेडल मिला है। डॉ.अन्नपूर्णी को स्पेस रिसर्च में उनके योगदान के लिए इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 46वीं COSPAR साइंटिफिक असेंबली के दौरान ये मेडल दिया गया। डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA), बेंगलुरु की डायरेक्टर हैं। इसके साथ ही डॉ.अन्नपूर्णी सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) की एडिशनल डायरेक्टर भी हैं। डॉ. अन्नपूर्णी तारों (स्टार्स), तारागुच्छों (स्टार क्लस्टर्स) और निकटवर्ती आकाशगंगाओं (गैलेक्सी) पर अपनी रिसर्च के लिए जानी जाती हैं। डॉ.अन्नपूर्णी ने भारत के पहले अंतरिक्ष आधारित वेधशाला मिशन ‘AstroSat’ में लगे अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) के लिए कैलिब्रेशन वैज्ञानिक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ‘COSPAR विक्रम साराभाई मेडल’ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विकासशील देशों के वैज्ञानिकों को उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। ये पुरस्कार ‘कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च’ (COSPAR) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संयुक्त रूप से दिया जाता है। इस मेडल की स्थापना वर्ष 1990 में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में की गई थी।
4. AIR चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की वियतमान यात्रा

5 अगस्त को एयर स्टाफ के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह वियतनाम की तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर पूरी की। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करना और सैन्य सहयोग को बढ़ाना है। एयर स्टाफ प्रमुख सिंह ने हनोई पहुंचकर भारत के राजदूत शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा से मुलाकात की। सिंह ने इस यात्रा के दौरान एयर डिफेंस-एयर फोर्स सर्विस के कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल वू होंग सोन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। ये यात्रा भारत और वियतनाम की उस साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसके तहत वे अपनी बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना चाहते हैं। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार के मुताबिक, भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सौदा भी किया है।
5. प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप देश नौरू ने बदला अपना नाम

प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप देश नौरू ने आधिकारिक तौर पर अपना नाम बदलकर नाओएरो गणराज्य कर लिया है। देश के राष्ट्रपति डेविड अदेआंग ने घोषणा की कि नया नाम देश की राष्ट्रीय भाषा में पारंपरिक वर्तनी और उच्चारण को दर्शाता है। नाम परिवर्तन के साथ ही देश का अंतर्राष्ट्रीय कोड एनआरयू से बदलकर एनआरओ कर दिया जाएगा। वहां के नागरिकों को अब नौरूअन के बजाय देई-नाओएरो के नाम से जाना जाएगा। विदेशों में आमतौर पर नाउ-रू के उच्चारण से जाना जाने वाला यह नया नाम नाउ-एरो बोला जाता है। लगभग 12 हजार लोगों की आबादी वाला नाओएरो गणराज्य, तुवालू और वेटिकन सिटी के बाद जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है। इस छोटे से प्रवाल चूना पत्थर के द्वीप पर पहले जर्मनी का उपनिवेश था, बाद में ऑस्ट्रेलिया का प्रशासन रहा और 1968 में इसे गणराज्य के रूप में स्वतंत्रता प्राप्त हुई।
6. लोकसभा ने पारित किया विनियोग विधेयक, 2026

लोकसभा ने विनियोग विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। यह विधेयक वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसमें 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान कुछ सेवाओं पर स्वीकृत राशि से अधिक खर्च की गई थी। इस राशि को पूरा करने के लिए भारत की संचित निधि से धन के विनियोग को अधिकृत करने का प्रावधान है। सरकार ने कुछ अतिरिक्त व्यय को पूरा करने के लिए 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मांगी है। यह राशि ऋण चुकाने पर खर्च की जाएगी। प्रस्तावित बिल के जरिए जरूरी व्यवस्थाओं, प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है ताकि अंतर्रांष्ट्रीय पूंजी को भारत की तरफ आकर्षित किया जा सके। इस बिल के जरिए भारत एआई डाटा से संबंधित निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। लोक लेखा समिति और सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति की रिपोर्ट को भी सदन के पटल पर रखा जाएगा।
7. संसद से पारित हुआ जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026

राज्यसभा की स्वीकृति के साथ ही संसद ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह विधेयक पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करना है। नया विधेयक विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाने और जन्म तथा मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना देने को प्रोत्साहित करने के लिए लाया गया है। विधेयक में प्रावधान है कि यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना पंजीयक को उसके घटित होने के एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो जन्म या मृत्यु की प्रामाणिकता के सत्यापन के बाद ही जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की स्वीकृति से इसका पंजीकरण किया जा सकता है।
8. भूविज्ञान और आपदा प्रबंधन सहयोग को मजबूत करने के लिए सीडेक और GSI ने किया समझौता

उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (सीडेक) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने अगली पीढ़ी की उन्नत तकनीकों के माध्यम से भूविज्ञान, खनिज अन्वेषण और आपदा प्रबंधन में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन आज नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन की उपस्थिति में किया गया। इस सहयोग का उद्देश्य उन्नत डिजिटल तकनीकों के माध्यम से जटिल उप-सतही अन्वेषण चुनौतियों का समाधान करना है।
9. मेघालय ने अपने राज्य पशु के संरक्षण के लिए मिशन क्लाउडेड लेपर्ड की शुरुआत की

मेघालय ने अपने राज्य पशु के संरक्षण के लिए समर्पित कार्यक्रम मिशन क्लाउडेड लेपर्ड की शुरुआत की है। इस मिशन में पर्यावास संरक्षण और पुनर्स्थापन, वैज्ञानिक अनुसंधान और दीर्घकालिक निगरानी, मजबूत संरक्षण उपाय, भू-दृश्य संपर्क, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की क्षमता निर्माण, सामुदायिक भागीदारी और जन जागरूकता शामिल हैं। यह मिशन वन और पर्यावरण विभाग द्वारा तैयार की जा रही मेघालय धूमिल तेंदुआ कार्य योजना द्वारा निर्देशित होगा। चल रहे वैज्ञानिक मूल्यांकन में अब तक बालपक्रम क्षेत्र में 21 धूमिल तेंदुओं की पहचान की गई है। राज्य के सभी प्रमुख पर्यावासों में इस मूल्यांकन का विस्तार किया जाएगा ताकि राज्य पशु की व्यापक जनसंख्या का अनुमान लगाया जा सके। यह घोषणा मुख्यमंत्री कॉनरैड के. संगमा ने 4 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय धूमिल तेंदुआ दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से की। धूमिल तेंदुआ को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित किया गया है। मेघालय में यह प्रजाति नोकरेक, बालपक्रम, बाघमारा, नरपुह और नोंघखिलम के वन क्षेत्रों और राज्य के सामुदायिक प्रबंधन वाले वनों में पायी जाती है।
10. डेंगू के खिलाफ श्रीलंका के साथ भारत, 500 लीटर टेक्निकल मैलाथियान की मदद

डेंगू के प्रसार को नियंत्रित करने के श्रीलंका के प्रयासों में भारत ने एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने मंगलवार को श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा को 500 लीटर टेक्निकल मैलाथियान (कीटनाशक रसायन) सौंपा। भारत ने यह सहायता ऐसे समय दी है, जब श्रीलंका के कई अस्पतालों में डेंगू वार्ड अब भी मरीजों से भरे हुए हैं। श्रीलंका में डेंगू के दैनिक मामलों में हाल के दिनों में कमी दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, संक्रमण के दैनिक मामले एक समय करीब 1,000 तक पहुंच गए थे, जो अब घटकर लगभग 500 रह गए हैं। हालांकि, मामलों में कमी के बावजूद अस्पतालों पर दबाव बना हुआ है। इससे पहले 14 जुलाई को संतोष झा और श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव अनिल जासिंघे ने देनियाया के बेस अस्पताल में चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत भारत सरकार 600 मिलियन श्रीलंकाई रुपये का अनुदान देगी। यह अस्पताल आपदा-प्रभावित क्षेत्र में स्थित होने के कारण स्थानांतरित किया जा रहा है। परियोजना को तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
11. हर्षिता बनीं टूर डी फ्रांस फेम्स से जुड़ने वाली पहली भारतीय महिला

भारत की युवा साइकिलिस्ट हर्षिता जाखड़ ने प्रतिष्ठित टूर डी फ्रांस फेम्स का हिस्सा बनने वाली पहली भारतीय महिला बन कर इतिहास रच दिया है। राजस्थान की 19 साल की खिलाड़ी ने रविवार को इस कठिन बहु-चरणीय साइकिल रेस के दूसरे चरण के औपचारिक शुभारंभ में आठ प्रतिभाशाली साइकिलिस्ट के दल का नेतृत्व किया। इस दल में अफगानिस्तान, अल्जीरिया, चिली, इथियोपिया (दो साइकिलिस्ट), नामीबिया और युगांडा की खिलाड़ी शामिल थीं। प्रतियोगिता की शुरुआत एक अगस्त को लुसान से हुई और इसका समापन नौ अगस्त को नीस में होगा। अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग संघ (UCI) द्वारा चयनित इस विशेष दल ने यूसीआई वर्ल्ड साइक्लिंग सेंटर (WCC) रोड टीम की कुछ साइकिलिस्ट के साथ रेस मार्ग के 4.5 किलोमीटर लंबे न्यूट्रलाइज्ड सेक्शन (गैर-प्रतिस्पर्धी शुरुआती चरण) पर सवारी की। टूर डी फ्रांस फेम्स महिलाओं की प्रतिष्ठित बहु-चरणीय साइकिल रेस है, जिसे पुरुषों की प्रसिद्ध टूर डी फ्रांस के समकक्ष माना जाता है। यह यूसीआई महिला विश्व टूर कैलेंडर की प्रमुख प्रतियोगिताओं में शामिल है।
12. भारत ने ब्राज़ील पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल 2026 में दबदबा बनाया: साओ पाउलो में SAI NCoE एथलीट और बीरी तकर चमके

27 जुलाई से 1 अगस्त, 2026 तक साओ पाउलो में आयोजित BWF पैरा वर्ल्ड सर्किट के ब्राज़ील पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल 2026 में भारतीय पैरा-बैडमिंटन टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 22 मेडल (9 गोल्ड, 6 सिल्वर और 7 ब्रॉन्ज़) जीतकर मेडल टैली में पहला स्थान हासिल किया और मेज़बान देश ब्राज़ील (8 गोल्ड) को पीछे छोड़ दिया। इसमें SAI नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (NCoE) के खिलाड़ियों ने 9 मेडल जीते और अरुणाचल प्रदेश के बिरी ताकर ने दो बार पोडियम पर जगह बनाई। टकर का मेन्स डबल्स में गोल्ड और मेन्स सिंगल्स में ब्रॉन्ज़ मेडल, टूर्नामेंट में भारत के शानदार प्रदर्शन का हिस्सा था, जिसमें भारतीय टीम ने कुल 22 मेडल जीते – इनमें 9 गोल्ड, 6 सिल्वर और 7 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल थे।
13. पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन

4 अगस्त को पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन हो गया। वे 90 साल के थे। डॉ. पाटिल 1967 से 1978 तक महाराष्ट्र विधानसभा के मेंबर रहे। डॉ. पाटिल ने 1983 में मुंबई में रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RAIT) की स्थापना की, जिससे डी. वाई. पाटिल शैक्षणिक समूह की नींव पड़ी। डॉ. पाटिल ने पाटिल ग्रुप की शुरुआत की थी और देशभर में 182 से ज्यादा कॉलेज शुरू किये। डॉ. पाटिल को शिक्षा में योगदान के लिए 1991 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। डॉ. पाटिल 2009-2013 तक त्रिपुरा के राज्यपाल रहे। 2013 में बिहार के राज्यपाल बने और 2014 में पश्चिम बंगाल के कार्यवाहक राज्यपाल रहे।
14. बाबरी विध्वंस जांच में शामिल जस्टिस मनमोहन सिंह का निधन

3 अगस्त को बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन सिंह (एम. एस.) लिब्रहान का निधन हुआ। वे 87 साल के थे। वे भारत की न्यायपालिका के वरिष्ठ न्यायविदों में गिने जाते थे और बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच से जुड़े सबसे चर्चित चेहरों में से एक थे। लिब्रहान आयोग का गठन 16 दिसंबर 1992 में हुआ था। 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की परिस्थितियों की जांच करने के लिए ये आयोग बनाया गया था। आयोग ने 2009 में लगभग 17 सालों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, इसे भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले जांच आयोगों में माना जाता है। साल 1987 में सिंह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने। फिर मद्रास हाई कोर्ट और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। रिटायरमेंट के बाद भी 2009 तक लिब्रहान आयोग के अध्यक्ष के तौर पर काम किया।
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