क्या आप जानते हैं थाली में छोड़े गए खाने की असली कीमत?
विश्व खाद्य दिवस पर चौंकाने वाले तथ्यप्रस्तावना हर साल 16 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व खाद्य दिवस (World Food Day) मनाया जाता है। यह दिन केवल अच्छे और स्वादिष्ट पकवानों की तस्वीरें साझा करने का नहीं, बल्कि इस बात पर विचार करने का है कि एक तरफ जहाँ करोड़ों लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हर दिन टन के हिसाब से खाना बर्बाद हो जाता है।
आइए जानते हैं विश्व खाद्य दिवस का इतिहास, इस साल की महत्ता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े कुछ बेहद चौंकाने वाले तथ्य।
1. विश्व खाद्य दिवस क्यों मनाया जाता है?
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की स्थापना 16 अक्टूबर 1945 को हुई थी। इसी की याद में 1979 से हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर से भुखमरी को खत्म करना, कुपोषण से लड़ना और सभी के लिए पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
2. भूख और बर्बादी से जुड़े 5 कड़वे तथ्य (Facts) * हर रात भूखे पेट सोते करोड़ों लोग: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 730 से 780 मिलियन (लगभग 78 करोड़) लोग हर रात भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। * खाने का एक-तिहाई हिस्सा बर्बादी की भेंट: वैश्विक स्तर पर उत्पादित होने वाले कुल भोजन का लगभग 33% (1.3 अरब टन) हिस्सा कभी किसी की थाली तक पहुँचता ही नहीं और बर्बाद हो जाता है। * पानी की बर्बादी: जब आप 1 किलोग्राम चावल बर्बाद करते हैं, तो आप सिर्फ खाना नहीं फेंकते, बल्कि उसे उगाने में इस्तेमाल हुआ लगभग 2,500 से 3,000 लीटर पानी भी बर्बाद कर देते हैं। * ग्लोबल वार्मिंग में योगदान: अगर बर्बाद होने वाले खाने को एक देश मान लिया जाए, तो यह चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश होगा। *
भारत में बर्बादी का आँकड़ा: ‘UNEP फूड वेस्ट इंडेक्स’ के अनुसार, भारत में औसतन हर व्यक्ति सालाना लगभग 55 से 50 किलोग्राम खाना घर पर बर्बाद कर देता है।
3. हम अपनी दैनिक जिंदगी में क्या बदलाव ला सकते हैं?खाना बचाना केवल सरकार या बड़ी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, इसकी शुरुआत हमारी थाली से होती है: * उतना ही लें थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में: प्लेट में उतना ही खाना परोसें जितना आप खा सकें। * स्मार्ट खरीदारी: बाजार जाते समय जरूरत के हिसाब से सामान की लिस्ट बनाएं ताकि एक्स्ट्रा सामान सड़कर खराब न हो। * बचे हुए खाने का सही इस्तेमाल: शादी-समारोहों या घर में बचा हुआ साफ खाना जरूरतमंदों या फूड बैंकों (जैसे ‘Roti Bank’) तक पहुँचाएं। * कंपोस्टिंग (खाद बनाना): गीले कचरे और फल-सब्जियों के छिलकों को फेंकने के बजाय पौधों के लिए जैविक खाद बनाएं।निष्कर्षभोजन केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।
विश्व खाद्य दिवस का असली मकसद तभी पूरा होगा जब हम भोजन की कद्र करना शुरू करेंगे। इस विश्व खाद्य दिवस पर आइए संकल्प लें कि हम न तो खुद अन्न की बर्बादी करेंगे और न ही दूसरों को करने देंगे।”अन्न का सम्मान करें, यही जीवन का सच्चा आधार है।”
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