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1. केंद्रीय ग्रामीण विकास व कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मिशन समृद्ध गाँव योजना का किया शुभारंभ

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में ‘मिशन समृद्ध गाँव’ योजना का शुभारंभ किया। ‘मिशन समृद्ध गाँव’ के माध्यम से गरीबी-मुक्त, रोजगारयुक्त और बुनियादी सुविधाओं से संपन्न गाँवों के निर्माण की दिशा में समग्र एवं एकीकृत मॉडल विकसित करनी की योजना है। यह मिशन विकसित भारत के संकल्प की मजबूत नींव समृद्ध, आत्मनिर्भर और गरीबी-मुक्त गाँवों से बनेगा। इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि इस मिशन का उद्देश्य ऐसे मॉडल गाँव विकसित करना है, जहाँ हर परिवार के पास रोजगार या आजीविका का अवसर हो, बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों और लोगों को मजबूरी में पलायन न करना पड़े। श्री चौहान ने कहा कि ‘मिशन समृद्ध गाँव’ के तहत मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुदनी और देवास जिले के खातेगांव ब्लॉक में पायलट मॉडल विकसित किए जाएंगे, जहाँ विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से गरीबी-मुक्ति, रोजगार सृजन और समग्र ग्राम विकास को व्यवहार में साकार किया जाएगा तथा सफल मॉडल को बाद में अन्य क्षेत्रों में दोहराया जाएगा। श्री चौहान ने कहा कि मिशन समृद्ध गाँव के तहत चयनित ब्लॉकों में परिवार से लेकर ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर तक समेकित विकास की रूपरेखा तैयार की जाएगी। प्रत्येक परिवार की आवश्यकताओं और पात्रता के आधार पर उसे केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजस्थान में जोजरी नदी के पास निर्माण कार्य पर रोक

सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान में जोजरी नदी के तट से 100 मीटर के दायरे के भीतर किसी भी निर्माण या विकास गतिविधि पर अंतरिम प्रतिबंध लगा दिया है। शीर्ष न्यायालय ने मौजूदा बाढ़ सीमा या नदी के वर्तमान प्रवाह पथ के दोनों ओर 500 मीटर के बफर क्षेत्र में किसी भी खतरनाक उद्योग या ऐसी गतिविधि की स्थापना पर भी रोक लगा दी है, जो प्रदूषण उत्पन्न करने में सक्षम हो। जोजरी एक मौसमी नदी है, जिसका उद्गम राजस्थान के नागौर ज़िले के पांडलू (पूंडलू) गाँव के निकट होता है। यह जोधपुर से होकर बहटे हुए खेजड़ला खुर्द के निकट लूनी नदी में मिल जाती है। यह लूनी नदी की एकमात्र प्रमुख दाहिनी तट की सहायक नदी है, जिसका उद्गम अरावली पर्वतमाला से नहीं होता है।
3. भारतीय चट्टान में बायोसिग्नेचर का प्राचीन दिनांकित प्रमाण

सहकर्मी-समीक्षित जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज़ (PNAS) में प्रकाशित एक अध्ययन में वर्तमान पूर्वी भारत क्षेत्र में लगभग 3.5 अरब वर्ष पूर्व विद्यमान सूक्ष्मजीवी जीवन के ठोस प्रमाण प्रस्तुत किये गए हैं। शोधकर्त्ताओं ने पूर्वी भारत के सिंहभूम क्रेटन में लगभग 3.5 अरब वर्ष पूर्व विद्यमान सूक्ष्मजीवी जीवन के ठोस प्रमाण खोजे हैं, जो अनेक रासायनिक एवं भू-वैज्ञानिक संकेतकों पर आधारित हैं। ये प्रमाण सिंहभूम क्रेटन में स्थित भीतड़दारी के कार्बन-युक्त बैंडेड चर्ट चट्टान से प्राप्त हुए हैं, जो झारखंड और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में विस्तृत है। चर्ट एक कठोर, सूक्ष्मकणीय एवं सिलिका-समृद्ध चट्टान है, जो अरबों वर्षों तक कार्बनिक पदार्थों को संरक्षित रख सकती है, जिससे यह प्राचीन जीवन के अध्ययन के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाती है। सिंहभूम क्रेटन भारत की सबसे पुरानी भू-वैज्ञानिक संरचनाओं में से एक है। इसमें ऐसी चट्टानें हैं जो 4 अरब वर्ष से भी पहले क्रस्ट (पृथ्वी की ऊपरी परत) के बनने का रिकॉर्ड संजोए हुए हैं। वैज्ञानिकों ने चट्टान में फँसे ज़िरकॉन क्रिस्टलों का विश्लेषण किया। अध्ययन किये गए आठ ज़िरकॉन में से चार की आयु लगभग 3,497 मिलियन वर्ष (3.5 अरब वर्ष) पाई गई। चूँकि ये ज़िरकॉन संभवतः चर्ट के निर्माण के दौरान ज्वालामुखीय राख से निक्षेपित हुए थे, इसलिये इन्होंने चट्टान की आयु निर्धारित करने में सहायता की। चट्टान की कार्बन आइसोटोप संरचना जीवित जीवों द्वारा कार्बन फिक्सेशन से जुड़े प्रतिरूपों से मेल खाती है, जो इसके जैविक उद्गम का संकेत देती है।
4. केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन हैकाथॉन 2026’ लॉन्च किया

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के लक्ष्यों को मजबूती देने के उद्देश्य से ‘क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन हैकाथॉन 2026′ (सीएमआईएच 2026) लॉन्च किया। इसके तहत छात्रों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक और आरएंडडी संस्थानों, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को अहम खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) से जुड़ी चुनौतियों के लिए नए तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह हैकाथॉन प्रतिभागियों को अपने आइडिया दिखाने, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन पाने और भारत में जरूरी खनिजों के लिए एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम बनाने में योगदान देने का प्लेटफॉर्म देता है। यह दो मुख्य समस्याओं पर फोकस करता है: ओपन डेटा से मिनरल प्रोस्पेक्टिविटी मैपिंग, जिसमें लिथियम या आरईई पेग्मेटाइट्स के लिए प्रोस्पेक्टिविटी हीटमैप बनाना और ज्ञात खनिज स्थलों से उसे सत्यापित करना शामिल है और अहम खनिजों के लिए स्मार्ट तकनीक और पेटेंट ट्रैकर, जिसका उद्देश्य जरूरी खनिजों के लिए एक आसान, वेब-बेस्ड स्मार्ट आरएंडडी और पेटेंट ट्रैकिंग सिस्टम बनाना है।
5. फारस की खाड़ी में स्थित हारा मैंग्रोव वनों को एक बड़े तेल रिसाव का खतरा

ईरान के केशम द्वीप (Qeshm Island) के हारा मैंग्रोव वन गंभीर पर्यावरणीय खतरे का सामना कर रहे हैं। फारस की खाड़ी में जारी संघर्ष और नौवहन से संबंधित तेल रिसाव की घटनाओं के बीच, तेल अवशेष द्वीप तक पहुँच गए हैं तथा संरक्षित मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया है। हारा मैंग्रोव वन ईरान के केश्म द्वीप (Qeshm Island) और खुरान जलडमरूमध्य (Khuran Strait) के आस-पास स्थित हैं, जो फारस की खाड़ी के तटीय क्षेत्र में स्थित सबसे बड़े एवं पारिस्थितिक रूप से महत्त्वपूर्ण मैंग्रोव पारितंत्रों में से एक हैं। इन वनों में मुख्य रूप से ग्रे मैंग्रोव (Avicennia marina) पाए जाते हैं, जिनकी विशिष्ट जड़ प्रणाली नमकीन जल को छानने तथा अत्यधिक लवणीय तटीय जल में जीवित रहने में सहायता करती है।
6. थाईलैंड में मैत्री-15 युद्धाभ्यास

भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-15’ में दोनों देशों के सैनिक हथियारों और रणनीति के साथ एक-दूसरे की युद्धकला, नजदीकी लड़ाई की तकनीक और आतंकवाद रोधी अभियानों का अनुभव भी साझा कर रहे हैं। अभ्यास के दौरान रॉयल थाई सेना ने अपनी प्रसिद्ध मुए थाई युद्धकला का प्रदर्शन किया, जबकि भारतीय सेना ने आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (एएमएआर) के जरिए नजदीकी मुकाबले और आत्मरक्षा की तकनीकों का प्रदर्शन किया।
7. सीएसआईआर-एनएएल ने स्वदेशी छोटे गैस टर्बाइन इंजन किए पेश

सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएएल) ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय में तीन स्वदेशी अत्यंत छोटे और लघु गैस टर्बाइन इंजन पेश किए। इनमें 5 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-05, 50 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-50 और 100 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-100 शामिल हैं। इन प्रणोदन प्रणालियों को सामरिक मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी), ड्रोन इंटरसेप्टर और सघन मिसाइल प्रणालियों समेत विभिन्न रक्षा अनुप्रयोगों के लिए विकसित किया गया है। इसे उन्नत एयरोस्पेस प्रणोदन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
8. स्वदेशी एके-203 राइफल बॉर्डर पर गरजने के लिए तैयार

भारतीय सेना के लिए स्वदेशी एके-203 राइफल अब बॉर्डर पर गरजने के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के मुंशीगंज थाना क्षेत्र स्थित आयुध निर्माण फैक्ट्री में तैयार की जा रही इस आधुनिक राइफल को ‘शेर’ नाम दिया गया है। एके-203 राइफल के निर्माण और तैयारियों को लेकर इंडो रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (आईआरआरपीएल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मेजर जनरल सुधीश कुमार शर्मा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि बहुत जल्द एके-203 राइफलों की खेप भारतीय सेना को सुपुर्द कर दी जाएगी। आईआरआरपीएल के एमडी और सीईओ मेजर जनरल सुधीश कुमार शर्मा ने आईएएनएस से कहा कि उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के मुंशीगंज में इस स्वदेशी राइफल का तैयार होना बेहद गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही एके-203 ‘शेर’ भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
9. केंद्र ने DRDO में विकसित मिसाइल प्रौद्योगिकी भारतीय रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने को मंजूरी दी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की प्रौद्योगिकी भारतीय रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है, ताकि देश में ही इनका उत्पादन किया जा सके। इस पहल के तहत, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) पात्र रक्षा कंपनियों को मिसाइल प्रौद्योगिकी सौंपेगा। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह कदम रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में ‘‘एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।’’ मंत्रालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करना और भारतीय एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों) तथा अन्य तकनीकी साझेदारों के लिए रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी के अवसर पैदा करना है। माना जा रहा है कि निजी क्षेत्र को आकाश वायु रक्षा मिसाइल, अस्त्र ‘एयर-टू-एयर’ मिसाइल और नाग टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल जैसे पारंपरिक हथियार बनाने की अनुमति दी जा सकती है।
10. संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहो कालिदास’ पुस्तक का विमोचन किया

संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में ‘कहो कालिदास’ पुस्तक का विमोचन किया। श्री शेखावत ने कहा कि महान कवि कालिदास के जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है और उनके व्यक्तित्व को लेकर अलग-अलग मत हैं। उन्होंने लेखक के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तक के माध्यम से कालिदास के व्यक्तित्व को समझने और उनके साहित्यिक जीवन को नए रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। ‘कहो कालिदास’ पुस्तक युगल जोशी ने लिखी है।
11. NSG ने महिलाओं को ट्रेनिंग देने के लिए पहला महिला कमांडो कन्वर्ज़न कोर्स शुरू किया

मानेसर में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ट्रेनिंग एकेडमी ने अपना पहला ‘महिला कमांडो कन्वर्ज़न कोर्स’ (MCCC) शुरू किया है। यह एक खास प्रोग्राम है जिसे राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की महिला कर्मियों को आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित करने के लिए बनाया गया है। यह उस क्षेत्र में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है, जहां पारंपरिक रूप से पुरुष कमांडो का दबदबा रहा है। 12 हफ़्ते का यह प्रोग्राम 24 अगस्त को शुरू हुआ। इसका मकसद चुनिंदा महिला कर्मियों को शारीरिक रूप से मज़बूत, तकनीकी रूप से कुशल और ऑपरेशन के लिए तैयार कमांडो बनाना है, जो आतंकवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुश्किल कामों को संभाल सकें। सिर्फ़ प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर ध्यान देने के बजाय, इस कोर्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह असल में हाई-रिस्क मिशन के लिए ज़रूरी ऑपरेशनल क्षमता विकसित कर सके।
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