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1. लद्दाख उपराज्यपाल ने पांच नए जिलों के गठन को मंजूरी दी
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश में पांच नए जिलों के गठन के लिए जारी अधिसूचना को मंजूरी दे दी है। इन नए जिलों के गठन के साथ लद्दाख में जिलों की कुल संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई है। पांच नवगठित जिलों में नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास शामिल हैं। अधिसूचना में सभी सात जिलों की क्षेत्रीय सीमाएं भी परिभाषित की गई हैं।
2. डॉ. एम श्रीनिवास नीति आयोग के मेंबर अपॉइंट हुए
26 अप्रैल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. एम श्रीनिवास नीति आयोग के मेंबर बने। डॉ. श्रीनिवास, डॉ. वीके पॉल की जगह लेंगे। डॉ एम श्रीनिवास नेशनल पॉलिसी के तहत हेल्थ डेवलपमेंट से जुड़े सुधार पर काम करेंगे। डॉ श्रीनिवास वर्तमान में एम्स दिल्ली के डायरेक्टर हैं और वे 22 सितंबर 2022 को एम्स के डायरेक्टर बने थे। डॉ श्रीनिवास 1994 में AIIMS दिल्ली में फैकल्टी मेंबर बने। डॉ श्रीनिवास 2011 में AIIMS दिल्ली में ही पीडियाट्रिक सर्जरी के प्रोफेसर बने। 2016 से 2022 तक डॉ श्रीनिवास कर्मचारी राज्य बीमा कंपनी (ESIC) हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज हैदराबाद के डीन रहे। डॉ श्रीनिवास के साथ ही प्रो. गोबर्धन दास, प्रो. अभय करांदिकर, केवी राजू और राजीव गौबा को भी नीति आयोग का मेंबर बनाया गया है। इससे पहले 25 अप्रैल को सीनियर अर्थशास्त्री डॉ. अशोक लाहिड़ी नीति आयोग के वाइस चेयरमैन बनाए गए हैं।
3. विदेश मंत्रालय ने दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया
विदेश मंत्रालय ने दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया है। अनुभवी राजनीतिज्ञ श्री त्रिवेदी मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में रेल मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का राज्यसभा और लोकसभा दोनों में प्रतिनिधित्व किया है। श्री त्रिवेदी वर्ष 2009 से 2019 तक बैरकपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए थे और इससे पहले राज्यसभा में कई कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। श्री त्रिवेदी को 2016-17 के लिए उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ संसदीय मंच सहित कई संसदीय मंचों की अध्यक्षता भी की है। वे तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद 2021 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
4. भारत और न्यूजीलैंड के बीच नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर
भारत और न्यूजीलैंड ने नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने की। पिछले वर्ष दिसंबर में अंतिम रूप दिए गए समझौते के अंतर्गत भारतीय निर्यात को सभी टैरिफ लाइनों पर शतप्रतिशत शुल्क-मुक्त किया गया। यह समझौता सेवाओं, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पारंपरिक चिकित्सा और निवेश के क्षेत्र में भी नए अवसर सृजित करता है। इसके अंतर्गत न्यूजीलैंड की 20 अरब डॉलर की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता देश भर में औद्योगिक विकास, नवाचार, अवसंरचना और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी। समझौते के अंतर्गत भारत ने डेयरी, कृषि और रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों में अपने मूल हितों की भी दृढ़ता से रक्षा की है।
5. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बिश्केक में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन-एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। सोशल मीडिया पोस्ट में श्री सिंह ने कहा कि बैठक के दौरान वे विश्व में व्याप्त सुरक्षा चुनौतियों के बीच वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेंगे। रक्षा मंत्री ने आतंकवाद और उग्रवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता के अपने दृढ़ रुख पर भी बल दिया। श्री सिंह ने कहा कि वे अन्य एससीओ सदस्य देशों के समकक्षों और बिश्केक में भारतीय समुदाय के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए उत्सुक हैं।
6. डाक विभाग और डीटीडीसी ने देश भर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
संचार मंत्रालय के अधीन डाक विभाग और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड ने देश भर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड के राष्ट्रीय चैनल प्रमुख श्री जतिंदर सेठी ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में नई दिल्ली में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य देश भर में पार्सल डिलीवरी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डाक विभाग के विशाल बुनियादी ढांचे और नेटवर्क के साथ-साथ डीटीडीसी के लॉजिस्टिक्स अनुभव का लाभ उठाना है। समझौता ज्ञापन दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2025 में शुरू हुए निरंतर सहयोग को दर्शाता है।
7. वनस्पतिशास्त्री एन. अलीम यूसुफ को AI आधारित संरक्षण ऐप के लिए WWF द्वारा सम्मानित
वनस्पति विज्ञानी एन. अलीम यूसुफ को ‘वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर’ की ओर से प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है। यह सम्मान उनके द्वारा विकसित AI-आधारित मोबाइल एप्लिकेशन को रेखांकित करता है, जिसे केरल में आक्रामक पौधों की प्रजातियों की पहचान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के साथ प्रौद्योगिकी के मेल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह पुरस्कार-विजेता एप्लिकेशन श्री एन. अलीम यूसुफ द्वारा विकसित किया गया था। वे मालाबार बॉटनिकल गार्डन और इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट साइंसेज में एक शोधकर्ता हैं। यह ऐप केरल भर में पाई जाने वाली लगभग 100 आक्रामक पौधों की प्रजातियों की पहचान करने में सक्षम है। यह मोबाइल-आधारित टूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करता है और यूज़र्स को उन नुकसानदायक पौधों की प्रजातियों को तेज़ी से पहचानने में मदद करता है, जो स्थानीय इकोसिस्टम के लिए खतरा बन गई हैं।
8. नवजात शिशुओं के लिए पहली बार Malaria की खास दवा को मिली मंजूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बच्चों में मलेरिया के मामले और इससे मौत के जोखिमों को कम करने हेतु एक अहम कदम की घोषणा की है। 24 अप्रैल 2026 को मलेरिया की पहली ऐसी दवा को मंजूरी दी गई है, जिसे खास तौर पर शिशुओं के लिए बनाया गया है। अब तक, शिशुओं का इलाज उन दवाओं से किया जाता था जो वयस्कों के लिए उपलब्ध थीं। इससे नवजात शिशुओं में डोज की गलती होने और इसके कारण जोखिम बढ़ने का खतरा बना रहता था। हर साल मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां लाखों लोगों की मौत का कारण बनती हैं। बरसात का मौसम आते ही मच्छरों का प्रजनन एवं मच्छर काटने से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साल 2024 में, दुनिया भर के 80 देशों में मलेरिया के लगभग 282 मिलियन (28.2 करोड़) मामले सामने आए और 6.10 लाख लोगों की मौत हो गई। साल 2023 की तुलना में मामलों में लगभग 9 मिलियन की बढ़ोतरी हुई थी। अफ्रीकी क्षेत्र पर इसका सबसे ज्यादा बोझ देखा जाता रहा है जहां मौतों में 5 साल से कम उम्र के बच्चों का आंकड़ा 75% तक होता है।
9. आंध्र प्रदेश ने ₹13,000 करोड़ का विशाल मशरूम मिशन शुरू किया
आंध्र प्रदेश राज्य सरकार ने लगभग ₹13,000 करोड़ के निवेश के साथ पहले ‘मशरूम मिशन’ की घोषणा की है। इस घोषणा का नेतृत्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने किया, और इस पहल का उद्देश्य राज्य को भारत का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक बनाना है। छोटे किसानों, स्वयं सहायता समूहों और निर्यात के अवसरों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, इस मिशन से पूरे राज्य में रोज़गार के अवसर पैदा होने और एक नई कृषि-आधारित मूल्य श्रृंखला (value chain) के निर्माण की उम्मीद है। यह प्रस्तावित मिशन एक बड़े पैमाने की कृषि पहल है, जिसे मशरूम उत्पादन और ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
कुल ₹13,000 करोड़ का निवेश।
इसका लक्ष्य प्रति वर्ष 67,500 टन मशरूम का उत्पादन करना भी है।
इसका उद्देश्य बिहार को पीछे छोड़ना भी है, जो वर्तमान में लगभग 45,000 टन उत्पादन के साथ शीर्ष स्थान पर है।
इस पहल के तहत, पूरे राज्य में कुल 1.62 लाख मशरूम इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
10. स्काईरूट एयरोस्पेस का ‘विक्रम-1’ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के नए युग का संकेत
भारत ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया, जब Skyroot Aerospace के ‘विक्रम-1’ (जो देश का पहला निजी तौर पर बनाया गया ऑर्बिटल रॉकेट है) को हैदराबाद स्थित कैंपस से श्रीहरिकोटा के लिए रवाना किया गया। यह घटना एक नए युग का संकेत है, जिसमें निजी कंपनियाँ भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं। इसका उद्देश्य दुनिया के तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में किफायती और ‘ऑन-डिमांड’ सैटेलाइट लॉन्च सेवाएँ उपलब्ध कराना भी है। इस रॉकेट को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में स्काईरूट के Max-Q कैंपस से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसका पेलोड फेयरिंग – जो एक ज़रूरी ढाँचा है और उड़ान के दौरान सैटेलाइट्स की सुरक्षा करेगा – अब सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुँचा दिया गया है, जो भारत का मुख्य स्पेसपोर्ट है। इसके साथ ही, उड़ान से पहले की ज़रूरी जाँच पूरी हो गई है। इस बीच, रॉकेट के प्रोपल्शन चरण पहले से ही लॉन्च स्थल पर मौजूद हैं, जिससे अंतिम एकीकरण और लॉन्च की तैयारियों का रास्ता साफ़ हो गया है। विक्रम-1 के लॉन्च से Skyroot Aerospace के पहली ऐसी निजी भारतीय कंपनी बनने की उम्मीद है, जो ऑर्बिटल लॉन्च का प्रयास करेगी।
11. केन्या के Sebastian Sawe ने 2 घंटे के अंदर पूरी की मैरानथन
केन्या केसेबास्टियन सावे (Sebastian Sawe) ने लंदन मैराथन में इतिहास रच दिया। सावे दुनिया के पहले धावक बने, जिन्होंने आधिकारिक रेस परिस्थितियों में दो घंटे की बाधा को तोड़ दिया। उन्होंने 1:59:30 के समय में मैराथन की दौड़ पूरी करते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाया। सावे से पहले केन्या के केल्विन किपटुम के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज था, जिन्होंने 2023 में शिकागो में 2:30:35 के समय में मैराथन पूरी की थी। सावे कानूनन दो घंटे के अंदर मैराथन की दौड़ पूरी करने वाले पहले धावक बने। उन्होंने साल 2019 में इलियुड किपचोगे के प्रदर्शनी मार्क 1:59:41 को पीछे छोड़ा।
12. ISSF जूनियर विश्व कप 2026: अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर भारतीय निशानेबाज़
भारतीय निशानेबाजों ने काहिरा में आयोजित आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप 2026 में 16 पदक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इन पदकों में पांच स्वर्ण, छह रजत और पांच कांस्य पदक शामिल हैं। हेमंत बर्मन ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि कजाकिस्तान के ओलेग नोस्कोव ने जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। उज्बेकिस्तान के निकिता सोकोलोव ने कांस्य पदक हासिल किया। मिश्रित ट्रैप टीम स्पर्धा में, जुहैर खान और अद्या कात्याल ने कांस्य पदक जीता। हंगरी ने जूनियर विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता।
13. अंतर्राष्ट्रीय डिजाइन दिवस
अंतर्राष्ट्रीय डिजाइन दिवस (International Design Day) हर साल 27 अप्रैल को मनाया जाता है। 27 अप्रैल के दिन 1963 में अंतर्राष्ट्रीय डिजाइन परिषद की स्थापना की गई थी। वर्ष 2020 तक, इस अवसर को विश्व डिजाइन दिवस के रूप में मनाया जाता था। यह दिन डिजाइन के महत्व और परिवर्तन लाने की इसकी क्षमता को पहचानने का अवसर है। इस वर्ष का विषय है – “द स्पेसिस इन बिटवीन”।
14. विश्व टैपिर दिवस
विश्व टैपिर दिवस हर साल 27 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन टैपिर प्रजाति के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मानव अतिक्रमण से इसकी रक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण है। टैपिर बड़े शाकाहारी स्तनधारी जीव हैं जो दक्षिण अमेरिका, मध्य अमेरिका और दक्षिणपूर्व एशिया के जंगल और वन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। बड़े शाकाहारी होने के कारण, टैपिर अक्सर मानव अतिक्रमण से प्रभावित होने वाली पहली प्रजाति होते हैं और पुनर्जनित वनों में लौटने वाले अंतिम जीवों में से होते हैं। आनुवंशिक रूप से विविध आबादी को बनाए रखने के लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में अबाधित भूमि की आवश्यकता होती है। वे बीज फैलाने वाले जीव के रूप में पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और पशु जगत में सबसे पुराने जीवित वंशों में से एक हैं।
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