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1. नासा के आर्टेमिस-II चंद्र मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटे
नासा के आर्टेमिस-II चंद्र मिशन केचारों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौट आए हैं। उनका ओरियन अंतरिक्ष यान, जिसे इंटीग्रिटी नाम दिया गया था, स्वचालित नियंत्रण प्रणाली के तहत प्रशांत महासागर में उतरा। चार सदस्यीय दल की यह वापसी ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण रही। इस रिकॉर्ड बनाने वाले चंद्र फ्लाईबाय मिशन के दौरान अंतरक्षि यात्रियों ने चंद्रमा के उन दूरस्थ हिस्से के दृश्य देखें, जिन्हें मानव आंखों द्वारा पहले कभी नहीं देखा गया था। इसके साथ ही उन्होंने पूर्ण सूर्यग्रहण का भी अवलोकन किया। कमांडर रीड वाइजमैन,पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन के साथ अंतरिक्ष यान ने ध्वनि की गति से 33 गुना तेज, यानि मैक 33 की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। ऐसा दृश्य नासा के 1960 और 1970 के दशक के अपोलो चंद्र अभियानों के बाद पहली बार देखने को मिला। 10 दिन के इस मिशन के दौरान यह दल 50 वर्षों से अधिक समय बाद चंद्रमा की ओर जाने वाला पहला मानव दल बना। इसने पृथ्वी से अब-तक की सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। चारों अंतरिक्ष यात्री नासा के विशाल स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट से उड़ान भरने वाले और ओरियन अंतरिक्ष यान में यात्रा करने वाले पहले मानव भी बने।
2. सीएआरआई बेंगलुरु को अंतरराष्ट्रीय मान्यता, आयुष क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि
केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई), बेंगलुरु ने जैव रसायन एवं रुधिरविज्ञान क्षेत्र में आईएसओ 15189:2022 मान्यता प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि इसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) का पहला संस्थान बनाती है जिसे यह वैश्विक मान्यता मिली है। संस्थान ने प्रतिवर्ष 1.5 लाख से अधिक परीक्षणों के साथ 50 मापदंडों के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त की है। एनएबीएल प्रमाणन के बाद प्रयोगशाला ने और सख्त आईएसओ 15189:2022 मानकों को पूरा करने में सफलता हासिल की है। सीएआरआई बेंगलुरु न केवल निदान सेवाएं प्रदान करता है, बल्कि आयुर्वेद और आयुष आधारित उपचारों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रोगियों की निगरानी और अनुसंधान परिणामों को बेहतर बनाने में मदद करता है। संस्थान 2021-22 में एनएबीएच और एनएबीएल दोनों प्रारंभिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाला पहला सीसीआरएएस संस्थान बन चुका है। यह बीआईएस आईएस/आईएसओ 9001:2015 प्रमाणन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
3. कुर्द नेता निज़ार अमेदी बने इराक के नए राष्ट्रपति
ईराक में पिछले वर्ष नवंबर में हुए संसदीय चुनावों के बाद, देश की संसद ने कुर्द राजनेता निज़ार अमेदी को देश का नया राष्ट्रपति चुना। अमेदी देश के पूर्व पर्यावरण मंत्री थे। वे वर्ष 2024 से बगदाद में कुर्दिस्तान पैट्रियटिक यूनियन के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख भी रहे हैं। इराक में अब प्रधानमंत्री का चुनाव होना है। ईराक की सांप्रदायिक सत्ता-साझाकरण प्रणाली के अंतर्गत प्रधानमंत्री का शिया मुस्लिम, संसदीय अध्यक्ष का सुन्नी मुस्लिम और राष्ट्रपति का कुर्द होना अनिवार्य है।
4. अफ्रीकी देश जिबूती में इस्माइल उमर गुएलेह की ऐतिहासिक जीत, छठी बार बने राष्ट्रपति
अफ्रीकी देश जिबूती में इस्माइल उमर गुएलेह राष्ट्रपति पद के चुनाव में छठी बार फिर से राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। उन्होंने 97 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किये। श्री गुएलेह ने सत्तारूढ़ दल के पूर्व सदस्य मोहम्मद फराह समतार को हराया। वे पहली बार 1999 में सत्ता में आए थे और दो दशकों से अधिक समय से शासन कर रहे हैं। लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्ग पर होने के कारण जिबूती का अत्यधिक रणनीतिक महत्व है।
5. ब्रिटेन ने मॉरिशस को चागौस द्वीपों की सम्प्रभुता सौंपने की योजना को अनिश्चित काल के लिए रोका
ब्रिटेन ने मॉरिशस को चागौस द्वीपों की सम्प्रभुता सौंपने की योजना को अनिश्चित काल के लिए रोक दिया है। यह फैसला अमरीका के इस योजना से समर्थन वापस लेने के बाद लिया गया। ब्रिटेन की सरकार ने कहा कि संसद में समझौते को मंजूरी देने वाला कानून समय की कमी के कारण पारित नहीं हो सका और इसके 13 मई को शुरू हो रहे संसद के अगले सत्र में पारित होने की सम्भावना कम है। ब्रिटेन की सरकार ने कहा कि यह समझौता अमरीका के समर्थन से ही आगे बढ़ेगा और अमरीका तथा मॉरिशस के साथ समझौते के लिए बातचीत चल रही है।
6. रायसेन में ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ का शुभारंभ
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दशहरा मैदान में ‘उन्नत कृषि महोत्सव 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय यह आयोजन 11 से 13 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें देशभर से किसान, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। महोत्सव का समापन 13 अप्रैल को होगा, जिसमें नितिन गडकरी शामिल होंगे।
7. तेलंगाना: 42 नक्सलियों के समर्पण के बाद नक्सल मुक्त घोषित हुआ राज्य
तेलंगाना में 42 नक्सलियों के समर्पण के बाद राज्य को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने कहा कि नक्सली कमांडर सोडी मल्ला सहित 42 नक्सलियों के समर्पण के बाद राज्य नक्सल मुक्त हो गया है। श्री रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना राज्य समिति पूरी तरह भंग कर दी गई है। उन्होंने बताया कि 42 नक्सलियों ने पांच एके-47 राइफल, चार एसएलआर राइफल, दो देसी ग्रेनेड, एक हजार से अधिक कारतूस और 800 ग्राम सोने के साथ समर्पण किया। श्री रेड्डी ने कहा कि पुलिस विभिन्न क्षेत्रों में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी का पता लगाकर उन्हें हटाने के लिए समर्पण करने वाले नक्सलियों की सहायता ले रही है। उन्होंने कहा कि समर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार से वित्तीय सहायता दी जा रही है और वे अपने रिश्तेदारों, दोस्तों से मिल सकते हैं और मीडिया से बातचीत कर सकते हैं। वर्ष 2024 से 2026 के दौरान 761 नक्सलियों ने 302 हथियारों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
8. बाराबंकी-बहराइच हाईवे से बढ़ेगा भारत-नेपाल व्यापार
उत्तरप्रदेश का बाराबंकी-बहराइच राजमार्ग भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक संबंधों की मजबूती में अपनी भूमिका के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के बाराबंकी-बहराइच खंड को 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी गई है, जिससे सीमा पार व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रूपाईडीहा लैंड पोर्ट और नेपाल के नेपालगंज से बेहतर संपर्क स्थापित करेगी। इस मार्ग के जरिए भारत से नेपाल को होने वाले अधिकांश निर्यात पहले से ही होते हैं, और नए हाईवे से इसमें और तेजी आने की संभावना है। इस कॉरिडोर के जरिए चावल, गेहूं, सब्जियां, दुग्ध उत्पाद और पशु चारा जैसे कृषि उत्पादों की आवाजाही आसान होगी। यात्रा समय 150 मिनट से घटकर 75 मिनट होने और औसत गति 40 किमी/घंटा से बढ़कर 80 किमी/घंटा होने से जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की बर्बादी कम होगी। इससे किसानों और व्यापारियों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।
9. एशियाई विकास बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के विकास पूर्वानुमान को बढ़ाया
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के विकास पूर्वानुमान को साढ़े 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। एडीबी के एशियाई विकास आउटलुक के अनुसार मजबूत घरेलू मांग, आसान वित्तपोषण स्थितियों और भारतीय वस्तुओं पर अमरीकी टैरिफ में कमी की वजह से चालू वित्त वर्ष में भारत में विकास मजबूत रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि एशिया और प्रशांत क्षेत्र की अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में इस वर्ष और अगले वर्ष कमी आएगी। पश्चिम एशिया में संघर्ष और निरंतर व्यापार अनिश्चितता के कारण इस क्षेत्र में आर्थिक विकास दर पिछले वर्ष के 5.4 प्रतिशत से घटकर इस और अगले वर्ष में 5.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
10. भारत में पहली बार जंगल में जन्मे चार चीता शावक, संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता
मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान मेंभारत में जन्मी एक मादा चीता ने चार शावकों को जन्म दिया है। पर्यावरण, वन्य और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इसे देश की चीता संरक्षण यात्रा में मील का पत्थर बताया। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि मादा चीता गामिनी केजीपी-12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। गामिनी की उम्र दो वर्ष से कुछ अधिक है और वह भारत में जन्मी दूसरी पीढ़ी की मादा चीता है। श्री यादव ने कहा कि2022 में चीता योजना के शुरू होने के बाद पहली बार जंगल में किसी मादा चीता ने शावकों को जन्म दिया है।
11. एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में सुजीत कलकल और अभिमन्यु मंडवाल ने जीता स्वर्ण
किर्गिस्तान के बिश्केक में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के सुजीत कलकल और अभिमन्यु मंडवाल ने स्वर्ण पदक जीते। फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में सुजीत उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को 8-1 से हराया। 70 किलोग्राम वर्ग में अभिमन्यु मंडवाल ने मंगोलिया के ओलंपियन तोमोर-ओचिरिन तुलगा को 5-3 से हराया। भारत के प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और चार रजत समेत कुल 14 पदक हो गए हैं। अमन सेहरावत 61 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में पहुंच गये है। अब उनका मुकाबला कोरिया के क्वांग म्योंग किम से होगा। मुकुल दहिया 86 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक के लिए ईरान के कामरान गसेमपुर को चुनौती देंगे।
12. विश्व पार्किंसन दिवस
हर साल 11 अप्रैल को ‘विश्व पार्किंसंस दिवस’ मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पार्किंसंस रोग के बारे में जागरूकता फैलाना है। यह एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका-संबंधी) बीमारी है, जो मुख्य रूप से बुज़ुर्गों को प्रभावित करती है। यह दिन लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और समय पर डॉक्टरी सलाह लेने के लिए प्रेरित करता है। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से इस बीमारी को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में काफ़ी मदद मिल सकती है। विश्व पार्किंसंस दिवस 2026 की थीम “देखभाल के अंतर को भरना” (Bridge the Care Gap) स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण चुनौती को उजागर करती है।
13. समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती
महान समाज सुधारक, दार्शनिक और लेखक ज्योतिबा फुले की जयंती 11 अप्रैल को मनाई गई। महाराष्ट्र सरकार ने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाली पहल की शुरूआत की। उनका जन्म 11 अप्रैल , 1827 को हुआ था और वह एक अग्रणी समाज सुधारक थे जिन्होंने ब्राह्मणवादी रूढ़िवादिता का विरोध किया, दलितों और महिलाओं के अधिकारों की मांग की और भारत में अनेक सामाजिक न्याय आंदोलनों की शुरुआत की। वे उन्नीसवीं सदी के एक सामाजिक कार्यकर्त्ता, चिंतक और लेखक थे जिन्होंने अपना जीवन जाति-व्यवस्था को चुनौती देने और वंचितों को सशक्त बनाने के लिये समर्पित किया, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, शूद्र तथा महिलाएँ शामिल थीं।थॉमस पेन की “राइट्स ऑफ मैन” पढ़ने के बाद फुले का दृष्टिकोण बदला, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय और समानता के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता के लिये प्रेरित किया। फुले ने वर्ष 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य जाति-आधारित भेदभाव का मुकाबला करना और ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना था। इस संगठन ने दीनबंधु समाचार पत्र और लोक नाटकों जैसे माध्यमों से अपना संदेश प्रसारित किया। वर्ष 1848 में, फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई और पुणे में तात्यासाहेब भिड़े के आवास में भारत का पहला लड़कियों का विद्यालय स्थापित किया। सावित्रीबाई भारत की पहली महिला शिक्षिका बनीं। उन्होंने वर्ष 1855 में मज़दूरों, किसानों और महिलाओं के लिये रात्रि विद्यालय भी शुरू किये। उन्हें वर्ष 1888 में सामाजिक कार्यकर्त्ता विट्ठलराव कृष्णाजी वांडेकर द्वारा उनके असाधारण योगदानों के लिये महात्मा की उपाधि दी गई, जिसने डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जैसे भविष्य के नेताओं को प्रेरित किया और भारत में जाति विरोधी आंदोलनों की नींव रखी।
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